अकादमी पुरस्कार घोषित होने पर इक्कीस कॉलेज की छात्रा निर्मला का गांव में हुआ सम्मान
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Saturday, 25 March 2023
ग्रामीण क्षेत्र प्रतिभाओं की खान है, बस उचित अवसर और सही मंच मिले
Friday, 24 March 2023
अकादमी साहित्य पुरस्कार इक्कीस कॉलेज की निर्मला शर्मा को
लूणकरणसर उपखण्ड में पहली बार मिला है किसी को यह पुरस्कार
लूणकरणसर, 24 मार्च। राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर का राज्य स्तरीय चंद्रदेव शर्मा साहित्य पुरस्कार इस बार इक्कीस कॉलेज, गोपल्याण की छात्रा निर्मला शर्मा को दिए जाने की घोषणा की गई है। साहित्य अकादमी अध्यक्ष डॉ.दुलाराम सारण और डॉ.सचिव बसंतसिंह सोलंकी ने शुक्रवार को वर्ष 2022-23 के विभिन्न साहित्यिक पुरस्कारों की घोषणा उदयपुर में अकादमी कार्यालय से की।
निर्मला को यह पुरस्कार कहानी विधा के लिए मिलेगा। पिछले दिनों हुए लम्पी रोग को केंद्र में रखकर लिखी गई उनकी कहानी "कोई चारा नहीं" के लिए यह पुरस्कार घोषित हुआ है। यह पुरस्कार उनको आगामी दिनों में आयोजित अकादमी के भव्य समारोह में दिया जाएगा। इसके अलावा एकांकी विधा के लिए तनिष्का पड़िहार, तारानगर, कविता विधा के लिए हिमांशु भारद्वाज, चूरू, निबन्ध विधा के लिए मैना कंवर सुजानगढ़ को यह पुरस्कार दिया जाएगा।
गौरतलब है कि निर्मला शर्मा स्नातक द्वितीय वर्ष की विद्यार्थी है। मलकीसर बड़ा गांव की निर्मला के पिता ओमप्रकाश खेती करते है वहीं मां कृष्णा देवी गृहणी है। साहित्य से सरोकार रखने वाली निर्मला कॉलेज के साहित्यिक वातावरण को अपने लेखन का आधार मानती है।
● इनको देती है श्रेय-
निर्मला का कहना है कि "इक्कीस कॉलेज का वातावरण साहित्यिक है। यहाँ की लाइब्रेरी समृद्ध है। कॉलेज के डॉ.हरिमोहन सारस्वत, राजूराम बिजारणियां और आशा शर्मा का सानिध्य लेखन के प्रति हमेशा प्रेरित करता है।"
● खुशी का इज़हार-
निर्मला शर्मा को चन्द्रदेव शर्मा पुरस्कार मिलने पर साहित्यकार राजूराम बिजारणियां, हरिमोहन सारस्वत 'रूंख', आशा शर्मा, कैलाश कुमार, हरिसिंह, संतोष, भीमसेन, ओंकारनाथ योगी, रामजीलाल घोड़ेला, जगदीशनाथ भादू, दुर्गाराम स्वामी, कान्हा शर्मा, नन्दकिशोर सारस्वत सहित विभिन्न जनों ने बधाई दी।
Monday, 27 February 2023
'आधुनिक बाल साहित्य:दशा एवं दिशा' पर जोधपुर में हुआ विमर्श
तकनीकी युग में बाल साहित्य ही बचा सकता है संस्कारों की थाती
लूणकरणसर, 27 फरवरी राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर एवं चनणी फाउण्डेशन, जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में जोधपुर आयोजित साहित्यिक आयोजन में लूणकरणसर उपखण्ड के साहित्यकार राजूराम बिजारणियां और मदनगोपाल लढ़ा ने शिरकत की। जोधपुर के होटल चंद्रा इन में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल और अकादमी अध्यक्ष दुलाराम सहारण ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। लूणकरणसर के कवि, चित्रकार राजूराम बिजारणियां ने "वर्तमान में बाल साहित्य लेखन और चुनौतियां" विषय पर पत्रवाचन करते हुए कहा कि तकनीकी युग में बाल साहित्य ही संस्कारों की थाती को बचा सकता है। महाजन के डॉ. मदन गोपाल लढ़ा ने प्रथम सत्र में अध्यक्षता का दायित्व निभाते हुए कहा कि घर में किताब का कोना होना चाहिए ताकि पठन की संस्कृति बची रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में सरदार व.भा. पुलिस वि.वि., जोधपुर, कुलसचिव, श्वेता चौहान (आई.ए.एस.) का सानिध्य रहा। कार्यक्रम संयोजक संतोष चौधरी ने फाउंडेशन की ओर से आभार प्रकट किया।
फूल वाली पार्टी ने किसे बनाया 'फूल' !
Sunday, 26 February 2023
मीलों के आत्ममंथन का वक्त !
Friday, 24 February 2023
कांग्रेस के सिपाही कालवा के पोत चौड़े, दलबदल कर वार्ड 26 की जनता से की सबसे बड़ी गद्दारी
खुद को कांग्रेस का सच्चा सिपाही और कर्मठ कार्यकर्ता बताने वाले ओमप्रकाश कालवा के पोत चौड़े आ गए हैं। पालिका में चल रहे संक्रमण काल के दौरान उन्होंने दल बदल कर साबित कर दिया है कि वह स्वार्थ सिद्धि के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। पूर्व विधायक गंगाजल मील को नीचा दिखाने की कोशिश में लगे कालवा का यह कदम स्थानीय राजनीति में क्या गुल खिलाता है यह भविष्य के गर्भ में है लेकिन इस निर्णय से नगरपालिका मंडल में उथल-पुथल और पार्षदों की खरीद-फरोख्त बढ़ना तय है।
Monday, 20 February 2023
लंबी लकीर खींची है मधु आचार्य ने !
(साहित्य अकादमी में राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के कार्यकाल की समीक्षा)
Wednesday, 8 February 2023
जाना हिंदी की सबसे खौफनाक क्रिया है !
(हाईलाइन निराश्रित गोवंश शिविर के बहाने)
कुदरत ने दुनिया की हर शह के प्रारंभ और अंत का वक्त मुकर्रर कर रखा है. इसी कड़ी में राजकीय पशु चिकित्सालय, सूरतगढ़ में पिछले 14 वर्षों से निरंतर चल रहे 'हाईलाइन निराश्रित गोवंश शिविर' के समापन का वक्त भी आ गया है. पशुपालन विभाग की इस जमीन पर अब न्यायालय परिसर का निर्माण होगा, जिसके लिए भू अंतरण की कार्यवाही पूरी हो चुकी है. इसी परिसर में संचालित मत्स्य विभाग और आयुर्वेदिक चिकित्सालय पहले ही अंतरित किये जा चुके हैं. अंतिम रूप से इस गोवंश शिविर को जाना है. यहां के पशुओं को दूसरी गौशाला में भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. नई कोंपलों के लिए पुराने पीले पत्तों का झरना जरूरी है, यही नियति है, जिसका स्वागत होना चाहिए. विदाई वक्त आज मन भारी है. आपसे इस शिविर के आरम्भ और यहां संचालित हुई गतिविधियों को साझा करता हूं.
नवंबर 2008 का समय रहा होगा जब राजकीय पशु चिकित्सालय में 'हाईलाइन निराश्रित गोवंश शिविर' प्रारंभ हुआ था. उस दिन सर्द कोहरे के मौसम में, रात्रि साढे़ ग्यारह के करीब सिटी पुलिस स्टेशन और गुरुद्वारे के बीच लगभग 200-250 गौवंश, जिनमें ज्यादातर कमजोर गोधे और छोटे बछड़े थे, जाने कौन लोग छोड़ गए थे. भारी धुंध में सड़क पर जाम लगा था, तत्कालीन एसडीएम राहुल गुप्ता, जो ताजा-ताजा आईएएस बने थे, मैंने.उन्हें फोन कर मौके पर बुलवाया. किसी के कुछ समझ में नहीं आ रहा था, लिहाजा अस्थाई व्यवस्था के लिए एक बार इन निराश्रित पशुओं को हमने प्रशासन और पुलिस के सहयोग से राजकीय पशु चिकित्सालय की टूटी-फूटी बिल्डिंग में बने दो बड़े हॉल में शिफ्ट कर दिया. चुनावी मौसम था, लिहाजा सुबह चारे-पानी की व्यवस्था में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई.
हाईलाइन की पूरी टीम ने प्रशासन के सहयोग से इस शिविर को चलाने का जिम्मा उठाया. जब किसी पुनीत कार्य की शुरुआत होती है तो हाथ स्वत: ही जुड़ते चले जाते हैं. दैनिक हाईलाइन ने इस गोवंश शिविर में सहयोग की अपील प्रकाशित करनी प्रारम्भ की तो कारवां बनता गया. शहर के प्रबुद्ध लोगों ने अपने स्वजनों के जन्मदिन, पुण्यतिथि और मांगलिक अवसरों पर सहयोग की निरंतरता बनाए रखी, जिसके चलते निराश्रित पशुओं के लिए बेहतर व्यवस्था बन पाई. बीकानेर रोड पर गुरुद्वारे के सामने लगे शेड के नीचे प्रतिवर्ष सर्दी के मौसम में इन बेजुबान पशुओं के लिए गरमा-गरम दलिये की सेवा भी जारी रहती थी जिसमें सभी प्रबुद्ध जनों का सहयोग मिलता था. यहां तक कि जैतसर विजयनगर, अनूपगढ़ और घड़साना के पाठकों का सहयोग भी इस शिविर को मिलता रहा. इसी शिविर से हमने सूरतगढ़ में पर्यावरण संरक्षण के लिए 'रूंख भायला' अभियान की शुरुआत की थी, जो आज वृक्ष मित्रों के प्रयासों में दूर-दूर तक जा पहुंचा है।
कोरोनाकाल में इस शिविर को भी संकट का सामना करना पड़ा, लेकिन ईश्वर की कृपा से पशुओं के चारे पानी की व्यवस्था में कमी नहीं आई. इसीलिए लगता है कि शिविर में सहयोग करने वाले सभी जागरूक लोगों के लिए धन्यवाद शब्द बहुत छोटा है.
यदि कुछ चेहरों का जिक्र न किया जाए तो बात अधूरी होगी. इस शिविर के संचालन में सबसे महती भूमिका जिस व्यक्ति की रही वह है आंचल प्रन्यास की अध्यक्ष श्रीमती आशा शर्मा, जिन्होंने अपनी व्यस्तता के बावजूद न सिर्फ नियमित सेवा दी बल्कि बेहतर व्यवस्था बनाने के हर संभव प्रयास किए. सर्द मौसम में प्रातः 6 बजे उठकर पशुओं के लिए दलिया तैयार करवाना, हरे चारे की व्यवस्था करना, कोरोना संकट काल में प्रत्येक अमावस्या पर सहयोगियों के साथ चौक पर खड़े होकर आर्थिक सहयोग एकत्रित करना, बीमार पशुओं की देखरेख करना, पानी के टैंकरों की व्यवस्था करना आदि छोटे-मोटे बहुत से काम ऐसे हैं, जिनमें सेवा भाव के साथ निरंतरता बनी रहना अत्यंत कठिन है लेकिन आशा जी ने इस दायित्व को बखूबी निभाया. यही कारण है कि उन्हें इस सेवा के लिए हमेशा भरपूर सराहना मिली और प्रशासन द्वारा भी समय-समय पर सम्मानित किया जाता रहा है. इसी कड़ी में स्वर्गीय विजय शर्मा, स्वर्गीय पवन सोनी, श्री रमेश चंद्र माथुर, श्री विजय मुद्गल, आयुर्वेद चिकित्सालय के श्री गोविंद सिंह, डॉ. एम एस राठौड़, दिलीप स्वामी उर्फ बबलू व संचालन सेवा दल के जगदीश नायक, असगर अली और जुम्मे खान का उल्लेख भी जरूरी है जिन्होंने निस्वार्थ भाव से अपनी सेवाएं दी. इस शिविर में पशु चिकित्सालय के स्टॉफ और सिटी पुलिस थाने का सहयोग भी निरंतर मिलता रहा है. हाल ही में ट्रांसफर हुए थानाधिकारी रामकुमार लेघा तो नित्य प्रति इस शिविर में सेवा देते रहे हैं. जाने कितने ऐसे चेहरे हैं जो मुझे याद नहीं, लेकिन उनकी निस्वार्थ सेवा के बिना यह सब संभव नहीं था. आज घड़ी उन सबका आभार इस बात के साथ कि-
देहों शिवा बर मोहे ईहे,
शुभ करमन ते कबभुं न टरूं
न डरौं अरि सौं जब जाय लड़ौं, निश्चय कर अपनी जीत करौं..
O Supreme Lord! May I never deviate from straight path. May I never fear enemies. Make me winner every time I enter the battlefield.
-Guru Gobind Singh Ji
डॉ. हरिमोहन सारस्वत 'रूंख'
शहर के बीचों-बीच शाहरुख खान बांट रहा कैंसर
- नशे के प्रचार में सहयोगी बना शहर का प्रशासन सूरतगढ़, 07 अक्टूबर। एक तरफ जहां जिले भर में पुलिस प्रशासन द्वारा नशामुक्ति अभियान चलाने की ...
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प्रोफेसर रजनीरमण झा हिंदी और संस्कृत साहित्य के उद्भट विद्वान हैं। वैदिक साहित्य का विश्लेषण और उस पर सारगर्भित टीकाएं उनके अध्ययन -लेखन की...














